Women’s Asia Cup Trophy Controversy
श्रीलंका को हराकर महिला एशिया कप का खिताब जीतने के बाद भारतीय टीम ने एक बार फिर ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। दुबई में हुए फाइनल के बाद का यह घटनाक्रम कुछ हद तक उस घटना की याद दिलाता है, जब सितंबर में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय पुरुष टीम ने भी इसी मैदान पर एशिया कप जीतने के बाद ट्रॉफी नहीं उठाई थी।
भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को मात देकर रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। हालांकि, खिताब जीतने के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में देरी हुई। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख होने के साथ-साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं।
समारोह में हुई देरी
रिपोर्ट के अनुसार, मोहसिन नकवी कुछ समय तक मंच पर मौजूद रहे, लेकिन बाद में वह अचानक वहां से चले गए। समारोह में लगभग एक घंटे की देरी हुई। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका की टीम को उपविजेता की पुरस्कार राशि का चेक सौंपा। वहीं, भारतीय महिला खिलाड़ियों ने BCCI सचिव देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला की मौजूदगी में मैदान के एक तरफ अपने तरीके से जीत का जश्न मनाया।
BCCI सचिव ने बताई ट्रॉफी नहीं लेने की वजह
ट्रॉफी विवाद के बाद इस मामले ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी। अब BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने Sports Tak को दिए एक विशेष इंटरव्यू में पूरे घटनाक्रम को लेकर सफाई दी है।
सैकिया के मुताबिक, भारतीय टीम पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि वह मोहसिन नकवी से एशिया कप की ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी। इसके बावजूद BCCI की ओर से सम्मानजनक तरीके से समारोह पूरा कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव दिया गया था।
BCCI ने प्रस्ताव रखा था कि ACC के डिप्टी चेयरमैन खालिद अल जरूनी भारतीय टीम को ट्रॉफी प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, मोहसिन नकवी ने इस विकल्प को स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद एक दूसरा सुझाव भी दिया गया। इसमें हाल की परंपरा के अनुसार विजेता टीम के क्रिकेट बोर्ड के किसी प्रतिनिधि से ट्रॉफी दिलाने की बात कही गई थी। लेकिन इस प्रस्ताव पर भी सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन, भारतीय टीम ने अपने रुख से पीछे हटने से इनकार कर दिया और ट्रॉफी स्वीकार नहीं की।