Jasprit Bumrah Injury
भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में शामिल जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) जब मैदान पर होते हैं तो उनकी मौजूदगी टीम इंडिया की गेंदबाजी को अलग स्तर पर ले जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक समस्या लगातार भारतीय टीम के सामने रही है—बुमराह का लंबे समय तक लगातार उपलब्ध नहीं रहना।
बुमराह कई बार चोट के कारण टीम से बाहर हुए हैं और इसी वजह से भारतीय टीम को अलग-अलग सीरीज में उनके वर्कलोड और फिटनेस को लेकर बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। यही कारण है कि अब उन्हें हर सीरीज में टीम का स्थायी हिस्सा मानने के बजाय उनकी फिटनेस को प्राथमिकता दी जाती है।
ताजा उदाहरण अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज है। भारतीय चयनकर्ताओं ने बुमराह को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया है, लेकिन उनकी उपलब्धता फिटनेस क्लियरेंस के अधीन रखी गई है। यानी टीम में नाम होने के बावजूद उनके खेलने का फैसला उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा।
ये भी पढ़ें: श्रीलंका से दूसरा टेस्ट ड्रॉ होते ही बदला भारत का समीकरण, अब WTC Final के लिए कितनी जीत जरूरी?
बुमराह की फिटनेस इतनी बड़ी चिंता क्यों है?
बुमराह कोई सामान्य तेज गेंदबाज नहीं हैं। वह अपनी गति, सटीक लाइन-लेंथ, यॉर्कर और खास एक्शन के कारण बल्लेबाजों के लिए बेहद मुश्किल गेंदबाज माने जाते हैं।
लेकिन तेज गेंदबाजी में शरीर पर काफी दबाव पड़ता है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में लंबे स्पेल और लगातार मैच खेलने से तेज गेंदबाज की पीठ, पैर और अन्य मांसपेशियों पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है।
बुमराह के मामले में सबसे बड़ी चिंता उनकी पीठ से जुड़ी समस्याएं रही हैं। उनके करियर में पहले भी बैक स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या सामने आ चुकी है और 2023 में उन्हें पीठ की सर्जरी से भी गुजरना पड़ा था।
2019 में सामने आई थी पहली बड़ी बैक इंजरी
बुमराह के चोटों के इतिहास में 2019 का साल महत्वपूर्ण रहा। उन्हें लोअर-बैक स्ट्रेस फ्रैक्चर हुआ था, जिसके कारण वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए थे।
यह इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि बुमराह उस समय भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज के रूप में तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहे थे।उस समय से उनकी फिटनेस को लेकर टीम मैनेजमेंट को अधिक सतर्क रहना पड़ा।
2022 में फिर बढ़ी बैक की समस्या
2022 में बुमराह की बैक समस्या दोबारा चर्चा में आई। शुरुआत में उनकी समस्या को बैक स्पैज्म बताया गया और उन्हें एशिया कप से बाहर रखा गया।
बाद में उन्हें रिहैब और कंडीशनिंग से गुजरना पड़ा। हालांकि उन्होंने वापसी की, लेकिन उनकी पीठ की समस्या ने भारतीय टीम के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था कि उन्हें कितने मैचों में लगातार खिलाया जा सकता है।
2023 में हुई पीठ की सर्जरी
बुमराह की चोटों का सबसे बड़ा पड़ाव 2023 में आया, जब उन्हें पीठ की सर्जरी करवानी पड़ी।
सर्जरी के बाद उनकी वापसी में लंबा समय लगा और उन्हें रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा। उस समय भारतीय टीम की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि बुमराह को जल्दबाजी में वापस लाने के बजाय पूरी तरह फिट होने का समय दिया जाए।
इसके बाद बुमराह ने शानदार वापसी की और खुद को दुनिया के सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजों में फिर से स्थापित किया।
वापसी के बाद भी सबसे बड़ा सवाल रहा वर्कलोड
बुमराह की वापसी के बाद उनकी गेंदबाजी का भार भी लगातार चर्चा में रहा। टेस्ट क्रिकेट में उन्हें लंबे स्पेल डालने पड़ते हैं। वनडे में महत्वपूर्ण ओवरों की जिम्मेदारी होती है, जबकि टी20 में पावरप्ले और डेथ ओवरों में उनसे सबसे ज्यादा उम्मीद की जाती है।
यानी तीनों फॉर्मेट में बुमराह से अलग-अलग परिस्थितियों में लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन मांगा जाता है।
2025 में एक रिपोर्ट के अनुसार, सर्जरी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी से लेकर उस समय तक बुमराह ने तीनों फॉर्मेट में बड़ी मात्रा में गेंदबाजी की थी। इससे उनके वर्कलोड को लेकर बहस और तेज हुई।
2024-25 में बुमराह पर बढ़ी जिम्मेदारी
बुमराह के करियर का एक शानदार दौर भी इसी अवधि में आया। उन्होंने भारत की तेज गेंदबाजी का नेतृत्व करते हुए तीनों फॉर्मेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेकिन सफलता के साथ उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ी। जब भी मैच मुश्किल परिस्थिति में पहुंचता है, कप्तान और टीम मैनेजमेंट अक्सर बुमराह की तरफ देखते हैं। यही स्थिति उनके वर्कलोड को और चुनौतीपूर्ण बनाती है।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी ने फिर बढ़ाई चिंता
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में बुमराह ने भारत की गेंदबाजी का लगभग अकेले नेतृत्व किया। उन्होंने सीरीज में बेहद ज्यादा गेंदबाजी की और कई मौकों पर लंबे स्पेल डाले। लेकिन इसी सीरीज के दौरान उन्हें पीठ से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह चैंपियंस ट्रॉफी 2025 से बाहर हो गए।
यह घटना बताती है कि बुमराह के लिए केवल “फिट होना” पर्याप्त नहीं है। टीम मैनेजमेंट को यह भी देखना पड़ता है कि वह कितने मैचों और कितने ओवरों का भार सुरक्षित रूप से उठा सकते हैं।
क्या बुमराह का गेंदबाजी एक्शन चोट का कारण है?
बुमराह का एक्शन क्रिकेट की दुनिया में काफी अलग है। उनका रन-अप छोटा है और गेंद रिलीज करने का तरीका भी दूसरे तेज गेंदबाजों से अलग दिखाई देता है।
हालांकि सिर्फ उनके एक्शन को उनकी चोटों का कारण बताना सही नहीं होगा। 2019 में उनकी बैक स्ट्रेस फ्रैक्चर के समय पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी कहा था कि चोट को सीधे उनके एक्शन से जोड़ना उचित नहीं है।
इसलिए यह कहना कि बुमराह की चोट सिर्फ उनके अनोखे एक्शन की वजह से होती है, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सही निष्कर्ष नहीं होगा।
असली समस्या: हाई-इंटेंसिटी फास्ट बॉलिंग और वर्कलोड
बुमराह की गेंदबाजी की सबसे बड़ी खूबी ही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती भी हो सकती है। वह सिर्फ तेज गेंद नहीं डालते, बल्कि अपनी गेंदबाजी में गति, सीम मूवमेंट, बाउंस और सटीकता के साथ लगातार उच्च स्तर की तीव्रता रखते हैं।
टेस्ट क्रिकेट में लंबे स्पेल डालना और फिर वनडे-टी20 क्रिकेट में अपनी गति और डेथ ओवर की गेंदबाजी को बनाए रखना किसी भी तेज गेंदबाज के शरीर के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसीलिए बुमराह के मामले में वर्कलोड मैनेजमेंट बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत उन्हें हर मैच में क्यों नहीं खिलाता?
इसका सीधा जवाब है—टीम इंडिया अब बुमराह की फिटनेस को सिर्फ एक सीरीज के नजरिए से नहीं देखती। बुमराह भारतीय क्रिकेट के लिए लंबे समय की संपत्ति हैं। इसलिए यदि किसी छोटी सीरीज में उन्हें आराम देने से उनके शरीर पर दबाव कम होता है, तो टीम मैनेजमेंट ऐसा फैसला ले सकता है।
मई 2026 में अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट और वनडे सीरीज के लिए घोषित टीम में भी बुमराह को आराम दिया गया था और उनकी अनुपस्थिति को वर्कलोड मैनेजमेंट से जोड़ा गया था।
बुमराह को ‘हर सीरीज का खिलाड़ी’ क्यों नहीं माना जा सकता?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। बुमराह भारत के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें हर सीरीज के हर मैच में खिलाया जा सकता है।
तेज गेंदबाजों के लिए लगातार क्रिकेट खेलना अलग तरह की चुनौती है। इसलिए भारत का लक्ष्य अब सिर्फ बुमराह को ज्यादा से ज्यादा मैच खिलाना नहीं, बल्कि उन्हें बड़े टूर्नामेंट और महत्वपूर्ण सीरीज के लिए फिट रखना भी है।
टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा चुनौती
तीनों फॉर्मेट में टेस्ट क्रिकेट बुमराह के शरीर पर सबसे ज्यादा मैच-लोड डाल सकता है। टेस्ट में एक गेंदबाज को एक ही मैच में कई स्पेल डालने पड़ सकते हैं। पांच दिन तक चलने वाले मुकाबले में गेंदबाजी का भार और बढ़ जाता है।
इसी वजह से बुमराह को टेस्ट क्रिकेट में लगातार खिलाने को लेकर टीम मैनेजमेंट को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है।
यहां तक कि 2025 में बुमराह ने खुद टेस्ट कप्तानी को लेकर भी वर्कलोड की चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बीसीसीआई से कहा था कि बार-बार कप्तानी की जिम्मेदारी लेने से उनके वर्कलोड और फिटनेस को लेकर अतिरिक्त चुनौती पैदा हो सकती है।
बुमराह की चोट का मतलब यह नहीं कि वह हमेशा चोटिल रहेंगे
यह भी समझना जरूरी है कि बुमराह को “injury-prone” कहकर पूरी कहानी खत्म नहीं की जा सकती। उन्होंने गंभीर चोट के बाद वापसी की है और वापसी के बाद लंबे समय तक विश्वस्तरीय प्रदर्शन भी किया है।
समस्या यह है कि उनके करियर में पीठ से जुड़ी समस्या दोबारा सामने आई है। इसलिए टीम मैनेजमेंट को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
अफगानिस्तान सीरीज में क्या है बुमराह की स्थिति?
अब सबसे ताजा स्थिति की बात करें तो भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए बुमराह को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया है।
लेकिन चयन में एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है—बुमराह की उपलब्धता फिटनेस क्लियरेंस के अधीन है। यानी उनका टीम में चयन होना यह गारंटी नहीं है कि वह तीनों मैच खेलेंगे। फिटनेस टेस्ट और टीम मैनेजमेंट के आकलन के बाद ही उनकी उपलब्धता पर अंतिम फैसला होगा।
अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज 13 से 17 सितंबर 2026 के बीच दिल्ली में खेली जानी है।