Saransh Jain Test Debut
दिल्ली: इंदौर के ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन ने 33 साल की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाकर अपने लंबे संघर्ष को सफलता में बदल दिया। श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो के एसएससी मैदान पर रविवार से शुरू हुए दूसरे टेस्ट में उन्हें भारतीय प्लेइंग-11 में शामिल किया गया। इसके साथ ही सारांश भारत के 320वें टेस्ट क्रिकेटर बन गए।
26 साल के संघर्ष के बाद मिला मौका
सारांश पिछले करीब 26 साल से क्रिकेट के मैदान पर लगातार मेहनत कर रहे हैं। हर दिन अभ्यास करना, गेंदबाजी करना और घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। आईपीएल में मौका नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा।
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33 साल और 145 दिन की उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले सारांश भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यूटेंट्स में शामिल हो गए हैं। उनसे पहले 1998 में रॉबिन सिंह ने 35 साल और 23 दिन की उम्र में भारत के लिए टेस्ट पदार्पण किया था।
पिता के सपने को बनाया प्रेरणा
सारांश के इस सफर में उनके पिता सुबोध जैन का बड़ा योगदान रहा है। पिता के संघर्ष और बीमारी के बीच सारांश ने भारत के लिए खेलने का सपना नहीं छोड़ा।
सुबोध जैन ने कहा, “सारांश 26 साल से क्रिकेट खेल रहा है। हमेशा कहता था कि पापा भारत के लिए खेलकर दिखाऊंगा। आज उसने मेरा सपना पूरा कर दिया। हम परिवार के साथ जैन मंदिर गए थे। लौटे तो टीवी पर देखा भी उसे टीम में शामिल किया गया है। हमारे लिए इससे खुशी का पल कोई दूसरा नहीं हो सकता।”
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी शानदार रिकॉर्ड
सारांश ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अब तक 2223 रन और 188 विकेट अपने नाम किए हैं। भारत-ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की थी। वहां उन्होंने नाबाद 70 रन बनाने के साथ छह विकेट हासिल किए थे।
दोस्त आईपीएल में चमके, लेकिन सारांश ने नहीं छोड़ी मेहनत
सारांश के बचपन के दोस्त वेंकटेश अय्यर और आवेश खान आईपीएल में अपनी पहचान बना चुके हैं। वहीं, उनके कई जूनियर खिलाड़ी भी आईपीएल तक पहुंच गए। इसके बावजूद सारांश ने घरेलू क्रिकेट में मेहनत जारी रखी।
इसी दौरान क्लब क्रिकेट में उनके साथ खेलने वाले रजत पाटीदार भी आईपीएल में आरसीबी के कप्तान तक बने। सारांश को हालांकि लंबे समय तक आईपीएल अनुबंध नहीं मिला, लेकिन उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाने की उम्मीद बरकरार रखी।